

विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर निशाना साधते हुए आदिवासी समाज के सम्मान और सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि देश की राष्ट्रपति आदिवासी महिला हैं और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भी आदिवासी हैं। इसके बावजूद मुख्यमंत्री ने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी समाज को एक ट्वीट तक करके बधाई नहीं दी।
उन्होंने अपनी पिछली सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था और पूरे प्रदेश में इस दिन को लेकर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे।

भूपेश बघेल ने मौजूदा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि आज स्थिति ऐसी है कि मुख्यमंत्री को अपने ही कार्यक्रम के लिए भी ‘ऊपर’ से अनुमति लेनी पड़ती है।
इस बयान के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में सियासी बहस तेज होने की संभावना है। एक तरफ भूपेश बघेल ने आदिवासी समाज के सम्मान और विश्व आदिवासी दिवस को लेकर सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, तो दूसरी तरफ अब सबकी नजर सरकार और मुख्यमंत्री की ओर है कि इस राजनीतिक हमले पर उनकी ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
कुल मिलाकर, विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर सामने आया यह बयान सिर्फ बधाई देने या न देने का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसके जरिए छत्तीसगढ़ की राजनीति में आदिवासी प्रतिनिधित्व, सम्मान और सरकार की कार्यशैली को लेकर एक नई सियासी बहस शुरू हो गई है।