
हरे-भरे खेत में उन्होंने खुद हल की मूठ संभाली और बैलों के साथ खेत जोता। इस दौरान उन्होंने खेती-किसानी से जुड़ी अपनी पुरानी यादों को भी साझा किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खेत में काम करने से उन्हें बचपन और किसान जीवन से जुड़ी यादें ताजा हो जाती हैं।

उन्होंने कहा कि खेती उनके लिए सिर्फ आजीविका का साधन नहीं, बल्कि जीवन का संस्कार है। गांव, खेत और मिट्टी ने उन्हें मेहनत, प्रकृति के साथ तालमेल और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का महत्व सिखाया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि किसान सिर्फ अनाज पैदा नहीं करते, बल्कि प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।
मुख्यमंत्री साय का यह अंदाज इसलिए भी खास रहा, क्योंकि प्रदेश की जिम्मेदारी संभालने के बावजूद वे आज भी अपनी खेती-किसानी और गांव की पुरानी परंपराओं से जुड़े नजर आते हैं।
यानी मुख्यमंत्री की कुर्सी से लेकर खेत की मेड़ तक… विष्णुदेव साय ने एक बार फिर दिखाया कि अपनी मिट्टी से जुड़ाव ही असली पहचान है।